Class 12 Physical Education Chapter 4 दिव्यांगों के लिए शारीरिक शिक्षा एवं खेल – कूद Notes In Hindi

12 Class Physical Education Chapter 4 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ( दिव्यांगों ) के लिए शारीरिक शिक्षा एवं खेल – कूद Notes In Hindi Physical Education and Sports for CWSN

TextbookNCERT
ClassClass 12
SubjectPhysical Education
Chapter Chapter 4
Chapter Nameविशेष आवश्यकता वाले बच्चों ( दिव्यांगों ) के लिए शारीरिक शिक्षा एवं खेल – कूद
CategoryClass 12 Physical Education Notes in Hindi
MediumHindi

Class 12 Physical Education Chapter 4 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ( दिव्यांगों ) के लिए शारीरिक शिक्षा एवं खेल – कूद Notes In Hindi जिसमे हम अक्षमता ( दिव्यांगता ) व विकार की अवधारणा अक्षमता ( दिव्यांगता ) के प्रकार , कारण व प्रकृति – संज्ञानात्मक , बौद्धिक , शारीरिक अक्षमता विकार के प्रकार , कारण व प्रकृति – ए.डी.एच.डी . , एस.पी.डी. , ए.एस.डी. , ओ.डी.डी. , ओ.सी.डी. अक्षमता ( दिव्यांगता ) शिष्टाचार विशेष आवश्यकताओं वाले दिव्यांग बच्चों के लिए शारीरिक गतिविधियों के लाभ विशेष आवश्यकताओं वाले ( दिव्यांग ) बच्चों के लिए शारीरिक गतिविधियों का निर्धारण करने के लिए रणनीतियाँ या सुलभ कराने की योजनाएँ आदि के बारे में पड़ेंगे ।

Class 12 Physical Education Chapter 4 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ( दिव्यांगों ) के लिए शारीरिक शिक्षा एवं खेल – कूद Physical Education and Sports for CWSN Notes In Hindi

📚 अध्याय = 4 📚
💠 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ( दिव्यांगों ) के लिए शारीरिक शिक्षा एवं खेल – कूद 💠

❇️ अक्षमता की अवधारणा :-

🔹 अक्षमता अर्थात् क्षमता की कमी । अक्षमता का तात्पर्य किसी व्यक्ति की शारीरिक , मानसिक , बौद्धिक , विकासात्मक , संज्ञानात्मक , संवेदी याइनमें से किसी भी प्रकार की समस्या से है , जो व्यक्ति की कार्य क्षमता को बाधित करती है ।

🔹 अक्षमता जन्मजात व किसी दुर्घटना के कारण भी हो सकती है । अक्षमता किसी व्यक्ति के जीवनकाल में भी हो सकती है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार , ‘ अक्षमता वह अवस्था होती है जिसमें व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है । 

❇️ अक्षमता के प्रकार :-

🔶 शारीरिक अक्षतमा :- इस स्थिति में पीडित व्यक्ति किसी शारिरिक क्षति के कारण अपनी दैनिक क्रियाए करने में अमथ रहता है उदाहरण के लिये अंधापन , आंशिक अंधामन , अस्तिष्कि प्लासी , सुनने में पेरशानी ।

🔶 सज्ञानत्मक अक्षमता :- इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति किसी क्षति के कारण अपनी दैनिक जीवन से जुडी मानसिक क्रियाओं को करने में अस्मर्थ रहता है उदाहरण के लिये पढ़ने में परेशानी , गिनती करने के परेशानी , शब्दों का अर्थ समझते में परेशानी आदि । सामान्यता इस अक्षमता का सम्बन्ध शरीर क्रियात्मक पक्ष से सम्बीन्धत होता है ।

🔶 बौद्धिक अक्षमता :- इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति किसी क्षति के कारण न केवल दैनिक जीवन से जुड़ी मानसिक क्रियाएँ कर पाता है अपितु अनुकूली व्यवहार सम्बन्धी क्रियाएँ भी नही कर पाता है ।

❇️ मानसिक कार्य :-

🔹 पढ़ना , तर्क देना , चीजों को समझना आदि । 

❇️ अनुकूली व्यव्हार :-

🔹 सामाजिक कौशल और वैचारिक कौशल का सग्रह ।

❇️ अक्षमताओं के कारण :-

  • संक्रामक रोग
  • वंशानुगत
  • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ
  • गलत ठीकाकरण अथवा गलत दवा का इस्तेमाल
  • कुपोषण
  • युद्ध
  • अंतःस्त्रावी ग्रंथि में रुकावट
  • बिमारी
  • जहर
  • नभिकीय दुर्घटना
  • नशीले पदार्थों का तथा हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल
  • स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
  • हानिकारक व प्रदूषित वातावरण में काम करना
  • शिक्षा की कमी

❇️ अक्षमता के कारण :-

🔹 विभिन्न प्रकार की अक्षमताएँ मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से होती है :-

🔶 आनुवांशिक कारण :- 

🔹 विभिन्न प्रकार की अक्षमताओं का कारण अनुवांशिक होती है अनुवांशिक कारणों में यदि किसी के परिवार में बहुत समय से कोई अक्षमता सबको होती आई है , तो आने वाले बच्चों पर भी इसका असर पड़ेगा । यह बच्चों को अपने माता – पिता से मिले असंतुलित जीन्स के कारण होता है । 

🔶 मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ :- 

🔹 विभिन्न अक्षमता डिप्रेशन व वाइपोलर विकार जैसी बीमारियों के कारण होती है । आमतौर पर देखा गया है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारणों का पता लगाना व इलाज बहुत मुश्किल है । जिसके कारण बहुत – सी अक्षमताएँ व्यक्ति को हो सकती है । 

🔶 दुर्घटना :- 

🔹 आज की भागती – दौड़ती जिंदगी में कब कहाँ और किसके साथ दुर्घटना हो जाए , यह कोई नहीं जानता । ऐसी बहुत – सी दुघटनओं के कारण व्यक्ति अक्षमता का शिकार हो जाता है । 

🔶 कुपोषण :-

🔹 हमारे देश में अक्षमता का एक सबसे बड़ा कारण कुपोषण है । अगर बच्चों को भोजन में आवश्यक तत्व नहीं दिए जाते , तो वह शारीरिक रूप से कमजोर हो जाते हैं । 

🔹 जैसे कैल्सियम की कमी है तो , हड्डियों में कमजोरी हो जाती है । यदि आयोडीन की कमी है , तो शरीर का वृद्धि व विकास रुक जाता है । विटामिन A की कमी से बच्चों में अंधापन हो सकता है । विटामिन B , की कमी के कारण बच्चों की स्मरण शक्ति कम हो जाती है और लकवा भी हो सकता है । 

🔶 बीमारी :- 

🔹 यदि किसी व्यक्ति को कैंसर , हृदयाघात , मधुमेह जैसी भयंकर बीमारियाँ बहुत लंबे समय से हैं तो वह किसी भी रूप में अक्षमता का शिकार हो सकता है , जैसे – कमर दर्द , ऑर्थोराइटिस , कंकाल संबंधी विकार आदि ।

🔶 शिक्षा की कमी :-

🔹 शिक्षा की कमी भी अक्षमता का कारण है । आमतौर पर देखा गया है कि मजदूर पढ़े – लिखे नहीं होते हैं जिसकी वजह से वह किसी भी रोग में बिना किसी डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवाई ले लेते हैं जिसके कारण किसी भी तरह की शारीरिक व मानसिक अक्षमता बढ़ सकती है ।

🔶 गरीबी :- 

🔹 गरीबी अक्षमता का एक बहुत बड़ा कारण आमतौर पर यह देखा जाता है कि गरीब व्यक्ति को किसी प्रकार की अक्षमता होने का खतरा अधिक होता है क्योंकि वे ऐसी जगहों पर रहते तथा कार्य करते हैं जहाँ पर साफ – सफाई की नजर से हालत काफी खराब होती है । वहाँ का माहौल जोखिम भरा होता है । उनका आवासीय स्तर काफी बुरी हालत में होता है ।

🔹 शिक्षा , साफ पीने का पानी एवं आवश्यक पोषक तत्वों तक उनकी पहुँच नहीं होती । दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि इन सभी मूलभूत आवश्यकताओं का अभाव उनके जीवन में होताहै । इसी वजह से वे कई बीमारियों से घिर जाते हैं जोकि आगे चलकर उनके लिए अक्षमता बन सकती है । कई बार ऐसे परिवारों में जन्म लेने वाले बच्चे जन्म से ही किसी अक्षमता से ग्रसित होते हैं । ऐसा इस कारणवश होता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान माँ को पूरक पोषक तत्वों की प्राप्ति नहीं हो पाती है ।

🔶 संक्रामक बीमारियाँ :- 

🔹 संक्रामक बीमारियाँ भी अक्षमता का एक कारण हो सकती है । वायरस , बैक्टीरिया आदि भी शीरिक अक्षमता का करण बन सकता है । यदि एक बच्चा किसी संक्रामक बीमारी से गसित हो जाता है तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आ जाती है । यदि बच्चे का भली – भाँति ध्यान न रखा जाए तो उन्हें कई तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है , जैसे पोलियो की दवा उचित समय पर न पिलाने से पोलियो के होने की संभावना हो सकती है ।

🔶 नशीले पदार्थों का सेवन :-

🔹 एल्कोहल , ब्राउन शुगर , एल.एस.डी , आदि के सेवन से भी अक्षमता हो सकती है । इन नशीले पदार्थों का सेवन करते – करते व्यक्ति इस नशे के जाल में फँस जाता है तथा इसका आदी हो जाता है जोकि शारीरिक , मानसिक अक्षमता का एक बड़ा करण बन जाता है ।

🔶 अंत : स्रावी ग्रंथि रुकावट :-

🔹 अंत : स्रावी ग्रंथि में रुकावट होने से अक्षमता होने की संभावना बढ़ जाती है । इन रुकावटों के कारण बच्चों को कई तरह की शारीरिक व मानसिक कमी आ सकती है ।

🔶 स्वास्थ्य पर ध्यान न देना :-

🔹 कई तरह की अक्षमताओं से छुटकारा सही समय पर देखरेख करके पाया जा सकता है । आमतौर पर पूर्ण रूप स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध न होने के कारण , गर्भावस्था के दौरान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ , खान – पान उपलब्ध न हो पाने के कारण जन्मजात ही बच्चों में शारीरिक , मानसिक अक्षमता पाई जाती हैं । 

🔹 इन क्षेत्रों के विशेषज्ञों द्वारा कुछ आपात्काल को हैंडल किया जाता है और अनुभवी चिकित्सक कई बार जन्म से होने वाली शारीरिक अक्षमताओं को रोक पाने में भी सफल होते हैं । आमतौर पर वे लोग जो आथिक रूप से कमजोर होते हैं , जिनकी आवसीय स्थिति काफी खराब होती है , उन्हें पूर्ण रूप से अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हो पाती हैं , जिसके कारणवश जन्मजात ही बच्चों में शारीरिक – मानसिक अक्षमताओं के होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है ।

🔶 नाभिकीय दुर्घटना :- 

🔹 1979 तथा 1986 में अमेरिका तथा यूक्रेन में हुई नाभिकीय दुर्घटना के कारण कई लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा । 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान में यू.एस.ए. द्वारा परमाणु बम गिराया गया था । इस तरह के हमलों को झेलने वाले स्थानों पर आज भी इन परमाणु हमलों से निकलने वाली हानिकारक किरणों ( Radia tions ) का असर देखने को मिलता है । 

🔹 वर्तमान समय में भी ऐसे स्थानों पर जन्म लेने वाले बच्चों में संज्ञानात्मक विकारों विकारों , जैसे Down Syndrone के होने की संभावना अधिक रहती है । इन स्थानों पर जन्म लेने वाले बच्चों में किसी – न – किसी प्रकार की शारीरिक – मानसिक अक्षमता होती ही है ।

🔶 टॉक्सिक पदार्थ , पेस्टीसाइड्स और इनसेक्टीसाइड्स :-

🔹 कई तरह के पदार्थों में टॉक्सिक जैसे लेड पारा आदि पाए जाते हैं । हानिकारक रसायनों , पेस्टीसाइड्स के इस्तेमाल से व्यक्ति में अक्षमता एवं शिशु में जन्मजात विकार होने की संभावना अधिक होती है । इसी कारणवश कुछ टॉक्सिक से मनुष्य के मस्तिष्क को खतरा होता है । इनसे व्यक्ति का दिमाग पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है जिससे कि अक्षमता आ जाती है ।

🔶 वातावरण :- 

🔹 तेजी से बदलते पर्यावरण , प्रदूषण तथा मिलावट के कारण लोग कुपोषण का शिकार हो रहे हैं । बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं में कुपोषण की समस्या भी कईप्रकार की अक्षमताओं का कारण बन सकती है । 

🔶 जीवन – शैली :- 

🔹 आधुनिक जीवन शैली , खानपान की बदलती आदतें , मोटापा , शारीरिक श्रम का अभाव भी समृद्ध परिवारों में विभिन्न प्रकार की अक्षमताओं का कारण बन रहे हैं । 

🔶 प्रसव के दौरान लापरवाही :- 

🔹 कई बार प्रसव के समय हुई किसी भी प्रकार की समस्या के कारण गर्भवती महिला या नवजात शिशु में अक्षमता की समस्या उत्पन्न हो सकती है ।

❇️ विकार की अवधारणा :-

🔹 विकार को आमतौर पर मानसिक विकार से जोड़ दिया जाता है । विकार व्यक्ति के प्रदर्शन व दैनिक दिनचर्या में काम करने की क्षमता को बाधित करता है ।

🔹 कोई भी विकार शुरुआत में साधारण समस्या जैसा प्रतीत होता दिखाई देता है , लेकिन धीरे – धीरे इसके परिणाम घातक होने लगते हैं । विकार का कोई समय नहीं होता । यह व्यक्ति को कभी भी प्रभावित कर सकता है । यदि विकार का सही समय पर पता नहीं चलता है तो वह आगे चलकर अक्षमता में बदल जाता है ।

❇️ विकारों के प्रकार :-

  • ( A ) ए.डी.एच.डी. ADHD – Attention Deficit Hyperactivity Disorder
  • ( B ) एस.पी.डी. SPD – Sensory Processing Disorder
  • ( C ) ए.एस.डी. ASD – Austins Spectrum Disorder
  • ( D ) ओ.सी.डी. OCD – Oppositional Deficit Disorder
  • ( E ) ओ.डी.डी. ODD – Obessive Compulsive Disorder

❇️ ADHD ( ए . डी . एच . डी ) अवधान न्यूनता अतिक्रिया विकार :- 

🔹 ए . डी . एच . डी . से पिडित व्यक्ति अत्याधिक सक्रिय हो जाता है तथा उसके लिये अपने आवेग को नियंत्रित करना मुशीकल हो जाता है ।

❇️ ADHD ( ए , डी . एच . डी . ) अवधान न्यूनता अतिक्रिया विकार के लक्षण :-

  • असंगठित 
  • एकाग्रता में कमी
  • आसानी से विचलित होना
  • लापरवाह गलतियाँ
  • एक जगह पर कम समय के लिये भी न बैठ पाना
  • बिना सोचे समझे कार्य करना
  • अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना
  • आत्म केद्रित व्यवहार
  • दिवा सवम्न देखना
  • दैनिक कार्य की भूल

❇️ ADHD ( ए . डी . एच . डी . ) के कारण :-

  • पदार्थों का हानिकारक सेवन
  • अनुवंशिक
  • मस्तिष्क की चोटे
  • मस्तिष्क की कार्यक्षमता तथा बनावट में कमी
  • भोजन
  • कुपोषण
  • समय से पूर्व जन्म
  • मस्तिष्क के रोग
  • जन्म के समय वजन में कमी
  • पारिवारिक अनुशासन की कमी
  • कोई शरीर क्रियात्मक समस्या

❇️ SPD ( एस . पी . डी . ) संवेदी प्रसंस्करण विकार :-

🔹 इस विकार में तंत्रिका तंत्र की कार्य समता में आयी कमी के कारण तन्त्रिता तंत्र , इद्रियों के माध्यम से प्राप्त हुई सूचना को प्राप्त करने में या तो अस्मर्थ हो जाता है अथवा इन सूचनाओं को प्राप्त करने में मुशकिल आती है ।

❇️ SPD ( एस . पी . डी . ) के लक्षण :-

🔶 व्यव्हारिक लक्षण :-

  • अवाज के प्रति अत्याधिक संवेदनशील होना ।
  • सुगन्ध के प्रति अत्यधिक संवदेनशील होना ।
  • रचनात्मक खेलों में शामिल न होना अकेलापन अपनाना ।

🔶 शारिरिक लक्षण :-

  • खराब आसन तथा खराब सतुलन ।
  • खराब माँसपेशीय नियत्रण ।
  • धीमी मांसपशिय वृद्धि । 
  • नदि न आना अथवा नदि कम आना 
  • शरीर के किसी हिस्से में अत्याधिक कम्पन्न ।
  • खराव तालमेल ।
  • असन्तुलन ।

🔶 मानसिक या मनोवैज्ञानिक लक्षण :- 

  • समाज से अलग रहना ।
  • अवसाद ।
  • आक्रमकता ।
  • चिंता ।
  • भीड़ से डर लगना ।
  • अचानक छूने से डरना ।

❇️ SPD ( एस . पी . डी . ) के कारण :-

  • वंशानुगत तत्व
  • असामान्य मस्तिष्क
  • तंत्रिका तंत्र सम्बंधी विकार
  • गर्दन के ऊपरी भाग तथा ब्रेन स्टेम सम्बधी चोट
  • वाता भोजन के तत्वों से एलर्जी
  • मादक पदार्थों का सेवन
  • खराब वतावरण 

❇️ ASD ( ए . एस . डी . ) – स्वलीनता आत्म वियोह वर्णपट विकार – औटिज्म स्पैक्ट्रम विकार :-

🔹 यह एक तत्रिका तंत्र तथा विकास से सम्बंधी विकार है । इस विकार में पिडित व्यक्ति किसी शब्द अथवा किसी वाक्य को बार – बार दोहरता है । सामाजिक संपर्क करने में कठिनाई लोगों के बीच में उठने व बैठने में हिचकते हैं ।

❇️ ASD ( ए . एस . डी . ) के लक्षण :-

  • बातचीत करने में समस्या ।
  • भाषा से सम्बधित समस्याए ।
  • आखों से सर्पक स्थाथित करने से बचना ।
  • सामाजिक क्रियाओं में भाग न लेना ।
  • बार बार दोहराने वाली क्रियाओं में व्यस्त रहना ।
  • किसी वस्तु को बार – बार छूना ।
  • स्वाद , अवाज तथा गंध के प्रति अत्याधिक संवेदनशील होना ।
  • समाजिक स्मर्पक स्थापित करने से बचना ।

❇️ ASD ( ए . एस . डी . ) के कारण :-

  • अनुवांशिक कारण
  • माता की गर्भवती के समय कुपोषक
  • वातावरण सम्बन्धी कारण
  • मस्तिष्क का अविकास

❇️ OCD ( ओ . सी . डी . ) मनोग्रसित बाध्यता विकार :-

🔹 इस विकार में पिडित व्यक्ति अपने से सम्बधित वस्तुओं को बार बार जाँचता है तथा दैनिक जीवन से जुडी कुछ क्रियाओं को बार – बार दोहराता है जैसे बार – बार हाथ धोना आदि ।

❇️ OCD ( ओ . सी . डी . ) के लक्षण :-

🔶 जुनूनी विचार :-

  • दूषित होने का डर ।
  • जरूरत से ज्यादा धार्मिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना ।
  • चीजो को खोने का डर ।
  • वहमी ।

🔶 बाध्यकारी व्यवहार :-

  • चीजो की दोहरी जाँच करना 
  • अपने प्यारो की कुशलता को बार – बार जाँचना ।
  • शब्दों को बार बार दोहराना ।
  • धाने तथा साफ करने कि क्रिया पर अत्याधिक समय व्यतीत करना ।
  • चीजों को व्यवस्थित करने में ज्यादा ध्यान देना ।
  • अत्याधिक प्रार्थना करना ।
  • घर में खराब सामान को इकठा करके रखना ।

❇️ OCD ( ओ . सी . डी . ) के कारण :-

🔶 जैविक तत्व :-

  • न्यूरोद्रांसमीटर के स्तर में कमी ।
  • मस्तिष्क के मार्गो में रुकावट ।

🔶 अनुवांशिक तत्व :-

  • जो मातापिता से बच्चों में स्थानांतिरत होते है ।

🔶 संक्रमण :-

  •  स्ट्रैप्टोकोकस से संक्रमित होना

🔶 वातारण सम्बन्धी तत्व :- 

  • पर्यावरण के तनाव

❇️ ODD ( ओ . डी . डी . ) विरुद्धक अवज्ञाकारी विकार :-

🔹 यह विघटनकारी व्यवहार विकार के नाम से भी जाना जाता है इस विकार में पीड़ित व्यक्ति अपने चारो ओर की चीजो को बाधित करता है । “ जिनमें बच्चे मर्म स्पर्शी , क्रोधी और विवादी व्यवहार व नकारात्मक सोच वाले हो जाते हैं । यह एक मानसिक व विघटन कारी विकार ।

❇️ ODD ( ओ . डी . डी . ) के लक्षण :-

🔶 व्यवहार :-

  • तर्क करना 
  • लडाई करना 
  • दूसरो को आरोपित करना 
  • स्वेच्छा से दोस्ती तोड़ना 
  • बार बार आज्ञा का उल्लंघन करना 
  • गुस्सा ज्यादा आता है

🔶 संज्ञानात्मक :-

  • अक्सर हताश होता 
  • ध्यान केन्द्रित करने में मुश्किल होना 
  • बोलने से पहले न सोचना 
  • ज्यादातर हताश रहना 
  • तनावग्रस्त रहना

🔶 मनोवैज्ञानिक :-

  • दोस्त बनाने में मुश्किल होना 
  • झुंझलाहट की भावना 
  • आत्मसम्मान की कमी 
  • अपनी मर्जी से काम करना

❇️ ODD ( ओ . डी . डी . ) के कारण :-

🔶 अनुवाशिक कारण :-

  • यदि परिवार के सदस्यों को मनोदशा सम्बन्धी विकार हो , चिन्ता सम्बन्धी विकार हो , व्यक्तित्व सम्बन्धी विकार हो ।

🔶 जैविक कारण :-

  • मस्तिष्क सम्बन्धी चोट 
  • न्यूरो ट्रांसमीटर का असामान्य रूप से कार्य करना 
  • जहरीले पदार्थो का सेवन 
  • कुपोषण

🔶 सामाजिक कारण :- 

  • अनुशासन हीनता 
  • धन की कमी 
  • हिंसात्मक वातावरण

🔶 वातावरण सम्बन्धी कारण :- 

  • पारिवारिक जीवन का ठीक न चलना

❇️ विकार की प्रकृति :-

  • सामाजिक विचारों को आदान – प्रदान करने की क्षमता में कमी । 
  • भाषा तथा विचारों को प्रस्तुत करने के कौशल विकास में कमी । 
  • विकार का संबंध तान्त्रिक तंत्र से । 
  • एक मनोविज्ञान या व्यावहारिक समस्या है । 
  • गतिविधियों को पूर्ण रूप से न कर पाना । 
  • अधिकतर विकार सदैव नहीं रहते , सही समय में उपचार करवाने से ठीक भी हो जाते हैं । 
  • विकार जन्म से बच्चों में होते हैं ।

❇️ अक्षमता शिष्टाचार का अर्थ :-

🔹 शिष्टाचार का अर्थ है शिष्टतापूर्ण आचरण तथा व्यवहार जिसे समाज द्वारा स्वीकार किया जाए । 

❇️ अक्षमता शिष्टाचार :-

🔹 किसी भी प्रकार अक्षमता से ग्रस्त व्यक्ति से वार्तालाप व व्यवहार जिससे असक्षम व्यक्ति से वार्तालाप व व्यवहार , जिससे असक्षम व्यक्ति को सामान्य व्यक्ति से संबंधी स्थापित करने में अच्छा लगे ।

❇️ अक्षमता शिष्टाचार के सिद्धान्त :-

🔹 ये वे सिद्धान्त है जिनका हमें तब ध्यान रखना चाहिए जब हम किसी अक्षम व्यक्ति के स्मर्पक में आते है । 

  • उचित शब्द का चयन हमें अक्षम व्यक्ति के लिए दिव्यांग शब्द से अथवा ” व्यक्ति अक्षमता के साथ ” शब्द को प्रयोग करना चाहिए ।
  • सहायक की सहायता के बिना दिव्यांग व्यक्ति से बातचीत करनी चाहिए ।
  • हाथमिलना ।
  • ध्धान पूर्वक सर्पक में आना ।
  • अपनी पहचान तथा साथ में आये दुसरे लोगों की पहचान से दिव्यांग व्यक्ति को अवगत करवाना ।
  • दिव्यांग व्यक्ति को ठीक उसी प्रकार से संमबोधित किया जाना चाहिए जैसे दूसरे लोगों को करते हैं ।
  • जब तक आपके द्वारा दी जाने वाली सहायता को अक्षम व्यक्ति स्वीकार न कर ले तब तक प्रतीक्षा करनी चाहिए ।
  • व्हील चेयर पर बैठे हुए व्यक्ति की पीठ कन्धे आदि पर दया दिखा कर नहीं थपथपाना चाहिए ।
  • व्हील चेयर पर नहीं झुकना चाहिए ।

❇️ विशेष जरूरतो वाले बच्चों अथवा दिव्याग के लिये शारीरिक क्रियाओं के लाभ :-

🔶 शारीरिक सुधार :- एकाग्रता में सुधार , लचक में सुधार , शाक्ति में सुधार सहनशीलता में सुधार , हृदय सम्बन्धी सुधार , मोटापे से पिडित होने की सम्भावना कम हो जाती है , हडियों मजबूत तथा मोटी हो जाती है अच्छी शारीरिक पुष्टि अच्छी हो जाती है जोड़ों की सूजन कम होती है , तथा तंत्रिका तंत्र की कार्य क्षमता में सुधार आता है । 

🔶 मानसिक सुधार :- मनोदशा में सुधार सुदोग्यता में सुधार अवसाद तथा चितां के स्तर में कमी आती है । 

🔶 आत्म सम्मान :- शारीरिक क्रियाओं में भाग लेने से दिव्यांग का आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान की भावना में बढोतरी होती है । 

🔶 स्वास्थ्य :- शरिरिक क्रियाओं में भाग लेने से दिव्यांग के स्वास्थ्य के स्तर में बढ़ोतरी होती है उसमें विकार उत्पन्न होने की सम्भावना कम हो जाती है । 

🔶 व्यक्तित्व :- शारीरिक क्रियाओं में भाग लेने से दिव्यांग के व्यक्तित्व के सभी पक्षों में निखार आता है । 

🔶 सामाजिक लाभ :- नये अनुभव प्राप्त होना , नये दोस्त बनते है , आजादों का अनुभव होता है , दोषारोपण से बचना आदि ।

🔶 कार्य क्षमता :- शरिरिक क्रियाओं में भाग लेने से व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ जाती है ।

❇️ विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिये शारीरिक क्रियाओं का निर्धारण करने की रणनितियाँ :-

🔶 डाक्टरी जाँच :- शारीरिक क्रियाओं में भाग लेने से पूर्व दिव्यांग की शारीरिक जांच करवा कर उसकी शारीरिक अक्षमता के स्तर की जाँच कर लेनी चाहिए ताकि उसके स्तर के अनुरूप ही शरिरिक क्रियाए उन्हें करवायी जा सके । 

🔶 पूर्व अनुभव :- शरिरिक क्रियाओं के निर्धारण से पूर्व दिव्यांग के पूर्व अनुभव की जानकारी ले लेनी चाहिए ताकि शारिरिक क्रियाओं का चयन उनके लिये उत्तम हो सके ।

🔶 रूचि :- जब शरिरिक क्रियाओं का निर्धारण किया जाये तो दिव्यांग की रूचि का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि वह इन शरिरिक क्रियाओं में पूर्ण रूप से भाग ले सके । 

🔶 क्षमता :- जब भी शरिरिक क्रियाओं का निर्धारण किया जाये तो दिव्यांग की शरिरिक तथा मानसिक योग्यता को समझ लेनी चाहिए ताकि उसकी क्षमता के अनुरूप शरीरिक क्रियाओं का चयन किया जा सके ।

🔶 रूपांतरित उपकरण :- उपकरणों का रूपांतरण हमेशा दिव्यांग की अक्षमता के स्तर क अनुरूप हो ताकि वह शारीरिक क्रियाओं में भाग ले सके । 

🔶 उपयुक्त वातावरण :- शारीरिक क्रियाओं का निर्धारण करते समय इस बात पर जरूर ध्यान देता चाहिए कि वातावरण उन क्रियाओं के अनुरूप है अथवा नही वातावरण में क्रियाओं से सम्बन्धित सभी सुविधाए होनी चाहिए ।

🔶 रूपांतरित नियम :- शारीरिक क्रियाओं का निर्धारण करने से पूर्व उनके नियमों को दिव्यांग की योग्यता क अनुसार रूपांतरित कर लेना चहिए ।

🔶 अनुदेश :- शारीरिक क्रियाओं के दौरान दिये जाने वाले अनुदेश दिव्यांग की अक्षमता की प्रकृति के अनुरूप हो उदाहरण के लिये दृष्टि सम्बन्धी दिव्यांग के अनुदेश सुनने वाले होने चाहिए ।

🔶 साधारण से मुश्किल :- शारीरिक क्रियाओं के निर्धारण के समय शुरू में आसान तथा धीरे धीरे मुश्किल शारीरिक क्रियाओं की ओर बढ़ना चाहिए । 

🔶 सभी अंगो का उपयोग :- शारीरिक क्रियाओं को निधारित करते समय अधिकतर सभी अंगों का उनमें भागीदारी होने को पुष्टि कर लेनी चाहिए ।

🔶 अतिरिक्त देख भाल :- शरीरिक क्रियाओं का निर्धारण करने से पूर्व दुर्घटना से बचाने वाले सभी तत्वों की समीक्षा जरूर कर लेनी चाहिए ।

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