Class 12 Physical Education Chapter 9 मनोविज्ञान और खेल Notes In Hindi

12 Class Physical Education Chapter 9 मनोविज्ञान और खेल Notes In Hindi Psychology and Sports

TextbookNCERT
ClassClass 12
SubjectPhysical Education
Chapter Chapter 9
Chapter Nameमनोविज्ञान और खेल
Psychology and Sports
CategoryClass 12 Physical Education Notes in Hindi
MediumHindi

Class 12 Physical Education Chapter 9 मनोविज्ञान और खेल Notes In Hindi जिसमे हम व्यक्तित्त्व अर्थ , परिभाषा तथा प्रकार लक्षण एवं प्रकार ( शैल्डन और जुंग का वर्गीकरण ) तथा बिग 5 लक्षण सिद्धांत अभिप्रेरण इसके प्रकार , विधि ( तकनीकी ) व्यायाम पालन : व्यायाम के कारण व्यायाम के लाभ व्यायाम पालन को बढ़ाने की रणनीतियाँ खेलों में आक्रामकता का अर्थ , अवधारणा तथा आक्रामकता के प्रकार आदि के बारे में पड़ेंगे ।

Class 12 Physical Education Chapter 9 मनोविज्ञान और खेल Psychology and Sports Notes In Hindi

📚 अध्याय = 9 📚
💠 मनोविज्ञान और खेल 💠

❇️ व्यक्तित्व का अर्थ :-

🔹 व्यक्तित्व शब्द लैटिन शब्द परसोना ( Persona ) से लिया गया है , जिसका अर्थ है “ मुखौटा ” अर्थात् व्यक्तित्व वह मुखौटा है जिसे लगा कर व्यक्ति अपने वातावरण के सम्पर्क में आता है । 

❇️ व्यक्तित्व :-

🔹 किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व में उसके शारीरिक गुण , मानसिक गुण , सामाजिक गुण , भावनात्मक गुण , रूचियाँ , व्यवहार , योग्यताए आदि सभी विशेषताएं शामिल होती हैं । जिनके साथ व्यक्ति अपने वातावरण के सम्पर्क में आता है ।

🔹 ” व्यक्ति की बनावट , व्यवहार का ढंग , रूचियां , सामर्थ्य तथा स्तर से व्यक्तित्व की परिभाषा दी जाती है ” ( Munn ) ” 

🔹 सभी जैविक गुण , विचार , रूझान , स्तर , इच्छाओं तथा अनुभव से अर्जित रूझानों का कुल योग व्यक्तित्व कहलाता है । ( Morton Prince )  

❇️ व्यक्तित्त्व के प्रकार :-

🔶 शैल्डन के द्वारा शरीरिक आधार पर :-

  • एण्डोर्मोफिक 
  • मेसोर्मोफिक 
  • एक्टोमॉफिक

🔶 जुंग के द्वारा मनौवैज्ञानिक आधार पर :- 

  • बर्हिमुखी 
  • अर्न्तमुखी 
  • अम्बीवर्ट ( उभयमुखी )

❇️ हर्बर्ट शेल्डन द्वारा दिए गए व्यक्तित्व के वर्गीकरण :-

🔹 शेल्डन ने शरीर का वर्गीकरण तीन भागों में किया है । वह एक अमेरिकन वैज्ञानिक थे जिसका जन्म 19 नवम्बर 1898 में हुआ था । उन्होंने व्यक्तित्व को शारीरिक बनावट के आधार पर तीन भागों में बांटा है ।

🔶 ऐक्टोमोर्फि ( सेरीब्रोटोनिया ) :- इनके कंधे संर्कीण होते हैं , हाथ व पाँव पतले , मुँह सर्कीण व छाती समतल होती है । वह पतले होते हैं , ज्यादा सोचते हैं , चुप रहना , स्वयं के बारे में सोचना , निराशवादी तथा गतिविधियों में कम रुचि रखते हैं ।

🔶 मेसोमोर्फि ( सोमेटोटोनिया ) :- इनका शरीर गढ़ीला होता है , कन्धे चौड़े , हाथ व पाँव ताकतवर व छाती बड़ी होती है इनमें माँसपेशियों की संख्या ज्यादा होती है वह उत्साही रोमांचक , आशावादी व प्रतियोगी होते है ।

🔶 एंडोमोर्फ ( विसरोटोनिया ) :- इनका शरीर गोल – मटोल होता है , बड़े कुल्हे , कन्धे संकीर्ण तथा वसा ज्यादा होती है । इनके हाथ व पाँव में ज्यादा वसा पाई जाती है । मजाकिया , आरामपंसद व सामाजिक प्रकृति के होते हैं ।

❇️ कार्ल जी जुंग के द्वारा दिए गए व्यक्तित्व का वर्गीकरण :-

🔶 अर्न्तमुखी :- यदि कोई व्यक्ति अपनी आन्तरिक सोचविचार , भावना व प्रतिबिंब के द्वारा ऊर्जावान या प्रेरित होता है , अर्न्तमुखी कहलाता है । उनके अन्दर कमजोर आत्मविश्वास , उदासीनता , शांत , निराशावादीता व कम सामाजिकता के लक्षण पाए जाते हैं ।

🔶 बर्हिमुखी :- इस प्रकार के व्यक्ति अपनी बाहरी दुनिया की चीजों व व्यक्तियों से संबंध रखते है । वह कर्म में विश्वास रखते हैं , वह सामाजिक व बातचीत या विचार विमर्श वाले होते हैं । उनका आचरण मित्रवत , आत्मविश्वासी , उत्तरदायी व एक जिन्दादिल नेता के रूप में जाने जाते हैं ।

🔶 उभयवर्ती ( एम्बीवर्ट ) :- इस प्रकार के व्यक्ति में अर्न्तमुखी बर्हिमुखी गुण होते हैं । इनके कुछ मित्र भी होते हैं ।

❇️ व्यक्तित्व का बिग 5 लक्षण सिद्धान्त :-

🔹 इस सिद्धान्त के अनुसार किसी भी व्यक्तित्व को आंकने के लिये 5 लक्षणों को आंकना चाहिए अर्थात् व्यक्तित्व का आंकलन 5 लक्षणों के आंकलन के आधार पर होता है ।

❇️ बिग 5 लक्षण सिद्धान्त के अनुसार व्यक्तित्व के लक्षण :-

🔶 स्पष्टता सम्बन्धी लक्षण :-

🔹 स्पष्टता सम्बन्धी लक्षण का आकंलन यह दर्शाता है कि व्यक्ति कितना :-

  • व्यावहारिक 
  • कल्पनाशील 
  • रूचि 
  • बौद्धिक जिज्ञासा कि चाह 
  • विभिन्न विषयों में रूचि रखने वाला 
  • रचनात्मकता 
  • भावना
  • नये अनुभवों का आनंद लेने वाला 
  • नये विषयों को सीखने में योग्य हैं

🔶 कर्तव्य निष्ठा सम्बन्धी लक्षण :-

🔹 कर्तव्यनिष्टता सम्बन्धी लक्षण का आकलन यह दर्शाता है कि व्यक्ति कितना :-

  • जीवन की चुनौतियों के साथ सक्षम ।
  • कितना आत्म अनुशासित है । 
  • कितना कृतव्यनिष्ट है । 
  • कितना योजना बद्ध कार्य करता है । 
  • कितना प्रबन्धन कला में कुशल है । 
  • दूसरों पर कितना निर्भर है ।
  • कितना कठोर परिश्रमी कितना महत्वकांशी है

🔶 बहिर्मुखता सम्बन्धी लक्षण :- 

🔹 इस लक्षण का आंकलन यह दर्शाता है कि व्यक्ति कितना :-

  • उर्जा 
  • सकारात्मक 
  • भावना 
  • स्वीकारत्मक 
  • मिलनसार 
  • बातूनी 
  • जिन्दादिल 
  • स्नेह 
  • मित्रतापूर्ण

🔶 सहमतता सम्बन्धी लक्षण :-

🔹 इस लक्षण का आंकलन यह दर्शाता है कि व्यक्ति कितना :-

  • व्यक्ति कितना उदार है । 
  • कितना दूसरो को सहयोग करने वाला है । 
  • कितना व्यवस्थित रूप से कार्य करने वाला है । 
  • कितना मित्रतापूर्ण है ।

🔶 मनोविक्षुब्धता सम्बन्धी लक्षण :-

🔹 इस लक्षण का आंकलन यह दर्शाता है कि व्यक्ति कितना :-

  • व्यक्ति कितना गुस्सा करने वाला है । 
  • कितना अवसाद में रहने वाला अथवा अवसाद पर उसका नियन्त्रण कितना है ।
  • कितना चिंतित रहता है । 
  • कितना भावनाओं पर नियंत्रण रख सकता है ।

❇️ प्ररेणा :-

🔹 प्ररेणा शब्द लेटिन शब्द “ मूवेयर ” से लिया गया है । जिसका अर्थ है ” चलना ” अर्थात् अभिप्ररेण वह स्थिति है , जिससे व्यक्ति अंदरूनी शक्तियों तथा बाहरी शक्तियों से प्रेरित होकर लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है । 

🔹 यह सर्वमान्य है कि “ चमत्कार तभी सम्भव हैं जब आप प्रेरित हो ” यह और कुछ नहीं बस- उत्तेजित होना- निरंतरता तथा किसी भी क्रिया को क्रम से करना या बनाए रखना है । खेलों में शिक्षक कोच का काम कुछ सिखाना / प्रशिक्षण देना नहीं होता अपितु सीखने के लिए । हमेशा प्रेरित करना होता है ।

❇️ अभिप्रेरणा का अर्थ :-

🔹 वह स्थिति जिसमें व्यक्ति आन्तरिक एवं बाहरी कारणों से प्रेरित होकर लक्ष्य की ओर लगातार अग्रसर रहता है ।

❇️ अभिप्रेरणा के प्रकार :-

🔶 आन्तरिक अभिप्रेरणा :- व्यक्ति अन्दरूनी शक्तियों से प्रभावित होकर लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है जैसे कि प्रसिद्धि तथा संतुष्टि से प्रेरित होकर खेलना , खुशी हेतू , कौशलों पर निपुर्णता , सामाजिक स्वीकृति तथा श्रेष्ठता का प्रदर्शन करना इत्यादि । 

🔶 बाहरी अभिप्रेरणा :- व्यक्ति बाहरी कारणों से प्रभावित होकर लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है । जैसे कि ईनाम से , धन से नौकरी से , प्रशंसा से प्रेरित होकर लक्ष्य की ओर बढ़ना ।

❇️ अभिप्रेरणा की तकनीक :-

  • प्रतिपुष्टि
  • मूल्यांकन 
  • अभ्यास की लम्बाई
  • विभिन्नताएँ 
  • आधुनिक उपकरण
  • दर्शक 
  • आसान लक्ष्य 
  • भर्त्सना 
  • छात्रवृत्तियाँ
  • ईनाम 
  • प्रशंसा
  • रोमांचक वातावरण
  • संचार माध्यम
  • रिकॉर्ड
  • क्रम देना
  • संयुक्त जिम्मेदारी

❇️ खेलों में प्रयोग होने वाली प्रेरणा की तकनीक :-

🔶 मूल्याकंन :- इसके माध्यम से व्यक्ति को उसकी स्थिति से अवगत करा कर उसे और अच्छा करने के लिये प्रेरित किया जा सकता है ।

🔶 विभिन्नता :- व्यक्ति के कार्यक्रम में विभिन्नताएँ ला कर उसे और रूचिकर बनाकर उसे लक्ष्य की ओर प्रेरित किया जा सकता है । 

🔶 दर्शक :- दर्शको की उपस्थिति में खिलाड़ियों में जोश उत्पन्न होता हे वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये प्रेरित होते हैं । 

🔶भर्त्सना :- खिलाड़ी के अनुचित प्रदर्शन की भर्त्सना करके भी उसे और अच्छा करने के लिये प्रेरित किया जा सकता है । 

🔶 छात्रवृत्ति :- खिलाड़ी को उचित परिणाम मिलने पर छात्रवृति देकर उसे ओर अच्छा करने के लिये प्रेरित किया जा सकता है । 

🔶 आधुनिक उपकरण :- आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करके वातावरण को अच्छा तथा रूचिकर बनाया जा सकता है जो कि खिलाड़ी को लक्ष्य की ओर प्रेरित करता है ।

🔶 अभ्यास की समय सीमा :- अभ्यास की अवधि को कम करके खिलाड़ी के भार ( Load ) को कम करके खिलाड़ी को लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जा सकता है । 

🔶 लक्ष्य निर्धारण :- आसान लक्ष्यों को निर्धारित करके खिलाड़ी को लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जा सकता है ।

🔶 पुरस्कार :- खिलाड़ी को लक्ष्य प्राप्ति पर पुरस्कार देने का वादा करके उसे लक्ष्य प्राप्ति के लिये प्रेरित किया जा सकता है । 

🔶 प्रशंसा :- उचित खेल प्रदर्शन पर खिलाड़ी को प्रशसा करके उसे और अधिक अच्छा करने के लिये प्रेरित किया जा सकता है ।

🔶 रूचिकर वातावरण :- वातावरण को संगीत , दर्शको आदि की सहायता से अधिक रूचिकर बनाकर , आदि की सहायता से अधिक रूचिकर बनाकर खिलाड़ी को लक्ष्य की ओर प्रेरित किया जा सकता है ।

🔶 संचार माध्यम :- जब खिलाड़ी के खेल प्रदर्शन को संचार माध्यम से प्रसारित किया जाता है तो खिलाड़ी प्रशंसा का पात्र बनने के लिये लक्ष्य प्राप्ति के लिये पूरे दमखम से प्रेरित होता है । 

🔶 उपलब्धियों का अभिलेख ( Record ) :- खिलाड़ी की उपलब्धियों का अभिलेख रखकर उसे समय – समय पर उसकी पूर्व उपलब्धियों से अवगत करवा कर भी उसे लक्ष्य की ओर प्रेरित किया जा सकता है ।

🔶 क्रम देना :- खिलाड़ियों को विभिन्न क्रम ( Rank ) देकर उन्हें और अच्छा के लिये प्रेरित किया जा सकता है ।

🔶 संयुक्त जिम्मेदारी :- खिलाड़ी को संयुक्त जिम्मेदारी देकर भी उसे कार्य कर के संयुक्त प्रयास का अनुभव करवाया जाता है ये अनुभव खिलाड़ी को और अच्छा करने के लिये प्रेरित करते है । 

🔶 प्रतिपुष्टि :- खिलाड़ी को उसके द्वारा किये गये प्रयासो की प्रति पुष्टि करवा कर और अच्छा करने के लिये प्रेरित किया जा सकता है ।

❇️ व्यायाम पालन :-

🔹 व्यायाम पालन से हमारा अभिप्राय व्यायाम करने के लिये एक व्यवस्थित दृष्टिकोण को लम्बे समय तक प्रारंभिक अभिग्रहण ( adoption ) चरण के उपरांत बनाये रखने से है । व्यायाम पालन किसी व्यक्ति के निरन्तर व्यायाम प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने को दर्शाता है ।

❇️ व्यायाम करने के कारण :-

🔹 व्यायाम करने के अनेक कारण हो सकते हैं । इससे कोई भी अपने दैनिक कार्यों को कुशलता व सरलता से कर सकता है । यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग – अलग हो सकते हैं ।

🔹 जैसे मेरे दादाजी का व्यायाम करना , मेरे व्यायाम करने के कारण से अलग होना , जैसे महिलाओं के कारण , पुरुषों से अलग हो सकते हैं या बच्चों के व्यायाम करने के कारण बिल्कुल भिन्न हो सकते हैं , प्रत्येक व्यक्ति के लिए व्यायाम करने के कारण उनकी आवश्यकता व अपेक्षा पर निर्भर करता है । वह या तो तदुरुस्त , या रोग एवम् विकारों से दूर रहने के लिए हो सकता ।

❇️ व्यायाम करने के कारण :-

🔶 मनोवैज्ञानिक कारण :- आक्रमकता , विक्षिप्त , संघर्ष , दक्षता 

🔶 जैविक व शरीर क्रियात्मक कारण :- विजय संकल्प , अस्तित्व के लिए संघर्ष 

🔶 सामाजिक कारण :- सहयोग प्रतियोगी 

🔶 आर्थिक कारण :- जीविका निर्वाह हेतु

❇️ व्यायाम अनुपालन को बढ़ाने के लिए विभिन्न रणनीतियों का प्रयोग :-

🔶 विचार – विमर्श करना :- व्यायाम के लाभ बताकर तथा उसके अंतर्गत विचार – विमर्श करके व्यायाम पालन को बढ़ाया जा सकता है । 

🔶 बाहरी प्रेरणा :- बाहरी प्रेरणा के अन्तर्गत पुरस्कार , प्रशंसा , ईनाम आदि की सहायता से व्यायाम पालन को बढ़ाया जा सकता है ।

🔶 उचित वातावरण :- व्यायाम के वातावरण में आधुनिक सुविधाएँ शामिल करके व्यायाम के वातावरण को ओर अधिक रूचिकर बनाकर व्यायाम पालन को बढ़ाया जा सकता है । 

🔶 वास्तववादी योजना :- वास्तवादी लक्ष्य जिनको प्राप्त करना ज्यादा मुश्किल न हो को निर्धारित करके व्यायाम पालन को बढ़ाया जा सकता है । 

🔶 सामाजिक समर्थन :- परिवार से मिलने वाला समर्थन , स्कूल से मिलने वाला समर्थन व्यायाम पालन को बढ़ाता है । 

🔶 दूसरो के साथ व्यायाम करना :- किसी भागीदार के साथ व्यायाम करना भी व्यायाम पालन को बढ़ाता है । 

🔶 व्यायाम कार्यक्रम को चुनौतिपूर्ण तथा दिलचस्प बनाना :- व्यायाम कार्यक्रम को यदि हम दिलचस्प तथा चुनौतिपूर्ण बना ले तो यह व्यायाम पालन को बढ़ाने में मदद करेगा । 

🔶 आन्तरिक प्रेरणा :- अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिये उत्पन्न आन्तरिक प्रेरणा व्यायाम पालन को बढ़ाने में मदद करती है । 

🔶 समय तथा पैसा :- पर्याप्त धन तथा समय का उपलब्ध होना व्यायाम पालन में मददगार होता है ।

❇️ आक्रामकता का अर्थ :-

🔹 आक्रामकमता शब्द व्यवहार की उस सीमा को दर्शाता है जिसमें व्यक्ति स्वयं को या दूसरों को या किसी वस्तु को शारीरिक व मनोवैज्ञानिक रूप से हानि पहुँचता है । इस प्रकार के व्यवहार का केन्द्र दूसरे व्यक्ति को शारीरिक व मानिकस रूप से हानि पहुँचाता होता है ।

❇️ आक्रामकता की अवधारणा :-

🔹 आक्रामकता की अवधारणा को जानना बहुत आवश्यक है क्योंकि आक्रामकता के प्रभावी ज्ञान से हम इसके सैद्धांतिक मॉडल पर ठीक से हस्तक्षेप तथा इसकी रोकथाम कर पायेंगे ।

❇️ आक्रामकता के प्रकार :-

🔶 शत्रुतापूर्ण आक्रामकता :- कोई भी शारीरिक व्यवहार जिसका एक मात्र लक्ष्य किसी दूसरे लाड़ी को शारीरिक रूप से जानबूझ कर नुकसान पहुंचाना होता है , उदाहरण के लिए जानबूझ कर किसी खिलाड़ी को हॉकी स्टिक से घायल करना होता है ।

🔶 बाह्य आक्रामकता :- कोई भी शारीरिक व्यवहार जिससे किसी दूसरे खिलाड़ी को शारीरिक रूप से नुकसान पहुचता हो परन्तु यह व्यवहार जानबूझ कर न किया गया हो उच्चतम प्रदर्शन की प्राप्ति के लिये किया गया है उदाहरण के लिये हॉकी स्टिक से अनजाने में किसी दूसरे खिलाडी का घायल होना । 

🔶 मुखर व्यवहार आक्रमकता :- वह मौखिक व्यवहार जिससे किसी खिलाड़ी को मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुँचाया जाता है मुखर व्यवहार आक्रमकता कहलाता है । मुखर व्यवहार हमेशा नियमों के दायरे में रह कर किया जाता है उदाहरण के लिये क्रिकेट खेलते समय बोले जाने वाली टिप्पणियाँ ।

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