Class 9 Political Science Chapter 1 लोकतंत्र क्या ? लोकतंत्र क्यों ? Notes In Hindi

9 Class Political Science Chapter 1 लोकतंत्र क्या ? लोकतंत्र क्यों ? Notes In Hindi what is democracy ? why democracy ?

TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectPolitical Science
Chapter Chapter 1
Chapter Nameलोकतंत्र क्या ? लोकतंत्र क्यों ?
what is democracy ? why democracy ?
CategoryClass 9 Political Science Notes in Hindi
MediumHindi

Class 9 Political Science Chapter 1 लोकतंत्र क्या ? लोकतंत्र क्यों ? Notes In Hindi जिसमे हम लोकतंत्र , लोकतंत्र की मुख्य विशेषताएँ , लोकतान्त्रिक सरकार की मुख्य विशेषताएँ , गैर – लोकतान्त्रिक सरकार के कुछ लक्षण , लोकतंत्र के खिलाफ तर्क , लोकतंत्र के पक्ष में तर्क आदि के बारे में पड़ेंगे ।

Class 9 Political Science Chapter 1 लोकतंत्र क्या ? लोकतंत्र क्यों ? what is democracy ? why democracy ? Notes In Hindi

📚 अध्याय = 1 📚
💠 लोकतंत्र क्या ? लोकतंत्र क्यों ? 💠

❇️ लोकतंत्र का अर्थ :-

🔹 डेमोक्रेसी ( लोकतंत्र ) यूनानी शब्द ‘ डेमोक्रेशिया ‘ से बना है । यूनानी में ‘ डेमोस ‘ का अर्थ होता है ‘ लोग ‘ और ‘ क्रेशिया ‘ का अर्थ होता है ‘ शासन ‘ । इस प्रकार डेमोक्रेसी अर्थात् लोकतंत्र का अर्थ है लोगों का शासन

❇️ लोकतंत्र :-

🔹 शासन का वह रूप है जिसमें शासकों का चुनाव जनता करती है लोकतंत्र कहलाता है । 

🔹 लोकतंत्र निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों पर आधारित होता है । लोकतंत्र में हर वयस्क नागरिक का एक वोट होता है । लोकतान्त्रिक सरकार संवैधानिक कानूनों और नागरिक अधिकारों के आधार पर ही काम करती है ।

❇️ अब्राहम लिंकन द्वारा लोकतंत्र :-

🔹 “ लोकतंत्र ऐसी सरकार है जो लोगों की हो , लोगों के लिए हो और लोगों द्वारा बनाई गई हो ” ( अब्राहम लिंकन )

❇️ लोकतंत्र की मुख्य विशेषताएँ :-

🔶 प्रमुख फैसले निर्वाचित नेताओं के हाथ में :-

🔹 उदहारण के साथ समझिए :-

🔹 पाकिस्तान का उदाहरण :-

  • पाकिस्तान में 1999 के तख्तापलट के बाद जनरल परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के मुखिया बन गए , बाद में खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया । संविधान में महत्वपूर्ण बदलाव कर सारे प्रमुख फैसले लेने के अधिकार एक ऐसी परिषद को सौंप दिए गए जिस पर सेना का प्रभुत्व था । चुने हुए प्रतिनिधियों को फैसले लेने के लिए ज्यादा स्वतंत्रता नहीं थी । 

🔹 पोलैंड का उदाहरण :-

  • इसी प्रकार पोलैंड में कम्युनिस्ट शासन के दौरान देश के महत्वपूर्ण फैसले सोवियत रूस द्वारा लिए जाते थे ना कि पोलैंड की चुनी हुई सरकार द्वारा ।

🔹 इसलिए लोकतंत्र में प्रमुख फैसले लेने की शक्ति लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के पास ही होनी चाहिए ।

🔶 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी मुकाबला :-

🔹 उदहारण के साथ समझिए :-

🔹 चीन का उदाहरण :-

  • चीन की संसद के लिए प्रति 5 वर्ष बाद नियमित रूप से चुनाव होते हैं , जिसे राष्ट्रीय जन संसद कहते हैं । चुनाव लड़ने से पहले सभी उम्मीदवारों को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से मंजूरी लेनी पड़ती है । सरकार हमेशा कम्युनिस्ट पार्टी की ही बनती है ।

🔹 मेक्सिको का उदाहरण :- 

  • मेक्सिको में हर 6 साल में राष्ट्रपति चुनाव होते हैं वहां कभी तानाशाही या फौजी शासन की स्थापना नहीं हुई परंतु हर बार पी आर आई नामक राजनीतिक संगठन ही चुनाव जीता था । वहां विपक्षी दल थे परंतु चुनाव पूर्ण रूप से इस पार्टी के नियंत्रण में होता था । यहां तक कि विदयार्थियों को कहा जाता था कि वह अपने पैरंट्स को कहे कि केवल पी आर आई के लिए ही वोट करें मीडिया , सरकारी मशीनरी , सरकारी कर्मचारी सभी लोग लोगों को पी आर आई के लिए कार्य करना पड़ता था । 

🔹 इसलिए केवल चुनाव करवा देना भर ही पर्याप्त नहीं है चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष भी होने चाहिए ।

🔶 एक व्यक्ति एक वोट एक मोल :-

🔹 हालांकि विश्व के ज्यादातर लोकतांत्रिक देशों ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत को स्वीकार कर लिया है परंतु आज भी विश्व के अनेक देशों में सभी लोगों को समान मतदान का अधिकार नहीं है । 

🔹 उदहारण के साथ समझिए :-

  • कुछ समय पूर्व तक सऊदी अरब में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था ।
  • एस्टोनिया में रूसी लोगों को मतदान का अधिकार हासिल करने में मुस्किल होती है ।
  • फिजी में वहां के मूल निवासी और भारतीय लोगों के वोटों के मूल्य में अंतर इस बात को इंगित करता है कई लोकतान्त्रिक देशों में भी नागरिकों को समान मताधिकार प्राप्त नहीं है ।

🔹 लोकतंत्र में हर व्यस्क नागरिक का एक वोट होना चाहिए और हर वोट का एक समान मूल्य होना चाहिए ।

🔶 कानून का राज और अधिकारों का आदर :-

🔹 उदहारण के साथ समझिए :-

  • जिंबाब्वे में 1980 मे आजादी प्राप्त होने के बाद से ज्यादातर समय रॉबर्ट मुगाबे का शासन रहा है वह एक लोकप्रिय नेता रहे हैं परंतु चुनाव जीतने के लिए हर प्रकार से मीडिया न्यायपालिका और हर उस संस्था को दबाया जिन्होंने उनकी सरकार का विरोध किया इस प्रक्रिया में कई बार लोगों के बुनियादी अधिकारों का अतिक्रमण हुआ ।

🔹 अतः जरूरी है कि सरकार नागरिकों के कुछ बुनियादी अधिकारों का आदर करें । उनको सोचने की , अपनी राय बनाने की , सार्वजनिक रूप से अपने विचार व्यक्त करने की , संगठन बनाने की , विरोध करने की और अन्य राजनीतिक गतिविधियां करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए ।

🔹 इसी प्रकार एक लोकतांत्रिक सरकार सिर्फ इसी कारण से मनमानी नहीं कर सकती कि उसने चुनाव जीता है बल्कि उसे अल्पसंख्यक समूहों की दी गई गारंटीओ का भी आदर करना पड़ता है । 

🔹इसलिए एक लोकतांत्रिक सरकार संवैधानिक कानूनों और नागरिक अधिकारों द्वारा खींची लक्ष्मण रेखाओं के भीतर ही काम करना है ।

❇️ इन परिभाषाओं का सारांश :-

  • लोगों द्वारा चुने शासकों द्वारा ही प्रमुख फैसले लिए जाते हों । 
  • चुनाव लोगों के लिए निष्पक्ष अवसर और इतने विकल्प उपलब्ध कराता है कि चाहे तो मौजूदा शासकों को बदल सकते हैं ।
  • यह विकल्प और अवसर सभी लोगों को समान रूप से उपलब्ध हो । 
  • इस चुनाव से बनी सरकार संविधान द्वारा तय बुनियादी कानूनो और नागरिक अधिकारों के दायरे को मानते हुए काम करती है ।

❇️ लोकतान्त्रिक सरकार की मुख्य विशेषताएँ :-

  • नागरिकों को भाषण देने व विचार व्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता
  • स्वतंत्र व निष्पक्ष रुप से चुनाव करने की व्यवस्था
  • राजनैतिक दलों को स्वतंत्र रूप से काम करने की आज्ञा
  • व्यापारियों को व्यापारिक संघ स्थापित करने की पूर्ण स्वतंत्रता
  • प्रेस को पूर्ण आज़ादी

❇️ गैर – लोकतान्त्रिक सरकार के कुछ लक्षण :-

  • लोग सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना नहीं कर सकते । 
  • शासनकर्ता सर्वेसर्वा होता है । 
  • विपक्षी दलों का कोई स्थान नहीं । 
  • मजूदरों को व्यापारिक संघ स्थापित करने की अनुमति नहीं ।
  •  प्रेस को पूर्ण आज़ादी प्राप्त नहीं ।

❇️ लोकतंत्र के खिलाफ तर्क :-

🔶 अस्थिरता :-

  • लोकतंत्र में नेता बदलते रहते हैं इससे अस्थिरता पैदा होती है ।

🔶 फैसलों में देरी :-

  • लोकतंत्र का मतलब सिर्फ राजनीतिक लड़ाई और सत्ता का खेल है यह नैतिकता की कोई जगह नहीं होती । लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने लोगों से बहस और सारे चर्चा करनी पड़ती है कि हर फैसले में देरी होती है । चुने हुए नेताओं को लोगों के हितों का पता ही नहीं होता इसके चलते खराब फैसले होते हैं । 

🔶 भ्रष्टाचार की संभावना :-

  • लोकतंत्र में चुनावी लड़ाई महत्वपूर्ण और खर्चीली होती है इसलिए इसमें भ्रष्टाचार होता है । 

🔶 चुनावी प्रक्रिया महंगी :- 

  • लोकतंत्र में चुनावी लड़ाई महत्वपूर्ण और खर्चीली होती है ।

🔶 सामान्य लोगों को सरकार चुनने का फैसला लेने में कठिनाई :-

  • सामान्य लोगों को पता नहीं होता कि उनके लिए क्या चीज अच्छी है और क्या चीज बुरी इसलिए उन्हें किसी चीज का फैसला नहीं करना चाहिए ।

❇️ लोकतंत्र के पक्ष में तर्क :-

🔶 शासन का अधिक जवाबदेही वाला रुप :-

  • अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ इसका प्रमुख कारण मानते हैं दोनों शासन व्यवस्थाओं में अंतर भारत में बहुदलीय शासन व्यवस्था थी , जहां विपक्ष था और सरकार की आलोचना करने वाली स्वतंत्र मीडिया जिसके कारण सरकार ने आगे बढ़ कर जनता को सहायता करने वाली कार्यवाही की । चीन की सरकार ने इस प्रकार के किसी भी कार्य को महत्वपूर्ण नहीं समझा ।
  • इसलिए लोकतांत्रिक शासन पद्धति दूसरों से बेहतर है क्योंकि यह शासन का अधिक जवाबदेही वाला स्वरूप है ।

🔶 बेहतर निर्णय लेने की सम्भावना :-

  • लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में प्रमुख फैसले व्यापक चर्चा और बहसों के बाद ही लिए जाते हैं जिससे कि गलती की गुंजाइश कम हो सके और बेहतर निर्णय लेने की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके । 

🔶 नागरिकों का सम्मान :-

  • लोकतंत्र नागरिकों का सम्मान बढ़ाता है जो हैसियत नागरिकों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में है वह अन्य किसी और व्यवस्था में नहीं ।

🔶 मतभेदों और टकराव को सँभालने का तरीका उपलब्ध :-

  • लोकतंत्र मतभेदों और टकराव को संभालने का तरीका उपलब्ध कराता है ।

🔶 गलतियों के सुधार के अवसर :-

  • सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह हमे अपनी गलती ठीक करने का मौका देता है ।

❇️ लोकतंत्र का वृहत्तर अर्थ :-

  • अतः लोकतंत्र का वृहत्तर अर्थ एक ऐसी शासन प्रणाली से है जिसमें सभी नागरिक को चाहे वह शक्तिशाली हो या कमजोर उसकी बात का समान महत्व हो ।
  • सरकार नागरिकों के बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए ये करें । 
  • लोकतंत्र के लाभों का वितरण समान रूप से हो ।
  • सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में समानता की स्थापना हो ।
  • गरीबी , अशिक्षा , भुखमरी जैसी कमजोरियों को ज्यादा से ज्यादा सरकारी प्रयास द्वारा समाप्त कर दिया गया हो ।
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